काशी-अयोध्या की तर्ज पर विकसित हो प्रयागराज धाम ♦️भाजपा नेता आचार्य हरिकेश शुक्ला ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब में रखी मांग📢

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प्रयागराज के विकास को मिले नया आयाम – भाजपा नेता आचार्य हरिकेश शुक्ला की केंद्र व प्रदेश सरकार से मांग

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब प्रयागराज में पत्रकारों से बोले आचार्य हरिकेश शुक्ला – प्रयागराज को “तीर्थराज रिवर फ्रंट बोर्ड” बनाकर काशी-अयोध्या की तर्ज पर किया जाए विकास

मुख्य समाचार:

प्रयागराज। भाजपा नेता आचार्य हरिकेश शुक्ला ने आज इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के नारद सभागार में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अद्वितीय प्रयागराज की गौरवशाली परंपरा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश और केंद्र सरकार को यहां के विकास के लिए विशेष योजना बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास में प्रयागराज एक प्रमुख बिंदु के रूप में उभरा है, जिसे आज विश्व पटल पर “प्रयागराज धाम” के नाम से जाना जा रहा है। इसलिए अब प्रयागराज में भी काशी, अयोध्या और वृंदावन की तर्ज पर “तीर्थराज रिवर फ्रंट बोर्ड” के गठन के साथ विकास कार्य किया जाना चाहिए, ताकि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले।

आचार्य शुक्ला ने कहा कि प्रयागराज के विकास के साथ-साथ यहां के महापुरुषों को भी राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील करते हुए कहा कि किसी वर्ग विशेष को राजनीति से बाहर करने जैसी साजिशों को समाप्त किया जाए और समाज के कमजोर तबके के बच्चों को आधुनिक डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण अंचलों में SC-ST वर्ग को आरक्षण का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उन्हें शिक्षा और तकनीकी सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जाएगी।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि प्रयागराज अब विश्व स्तर पर अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बना चुका है। यहाँ हर वर्ष लाखों-करोड़ों की भीड़ उमड़ती है, इसलिए अब प्रयागराज में एम्स हॉस्पिटल जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा की स्थापना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रयागराज को आत्मनिर्भर शहर बनाने के लिए यहां तेल रिफाइनरी प्लांट, सीमेंट उद्योग, रेलवे फैक्ट्री, रक्षा उत्पादन इकाइयाँ और डिजिटल इंडस्ट्रीज की स्थापना की जाए। साथ ही, उन्होंने शिक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की।

निष्कर्ष:

भाजपा नेता आचार्य हरिकेश शुक्ला का यह वक्तव्य प्रयागराज को धार्मिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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