अमेरिका ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ को दिया न्योता, भारत की चिंताओं को किया नजरअंदाज — आखिर क्यों बढ़ रहा है पाकिस्तान प्रेम? ज़ैद उल्लाह की रिपोर्ट

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अमेरिका ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ को दिया न्योता, भारत की चिंताओं को किया नजरअंदाज — आखिर क्यों बढ़ रहा है पाकिस्तान प्रेम?

एडिटर इंचीफ ज़ैद उल्लाह
एडिटर इंचीफ
ज़ैद उल्लाह

नई दिल्ली। अमेरिका ने अपने सैन्य कार्यक्रम ‘आर्मी डे’ पर पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को औपचारिक न्योता भेजा है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब भारत पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगाता रहा है। भारत के लिए यह एक सामरिक चिंता का विषय बन गया है कि उसका रणनीतिक साझेदार अमेरिका अब खुले तौर पर पाकिस्तान को तरजीह दे रहा है।

📌 अमेरिका-पाकिस्तान का पुराना रिश्ता फिर गर्म?

अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं।

  • 1980 के दशक में अफगान जंग के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को रणनीतिक बेस बनाया।
  • पाकिस्तान को अमेरिका से भारी मात्रा में आर्थिक और सैन्य मदद मिली।
  • हालांकि पिछले कुछ वर्षों में ये रिश्ते कमजोर हुए, लेकिन अब अमेरिका फिर से पाकिस्तान की तरफ झुकाव दिखा रहा है।

इस बार अमेरिका ने पाकिस्तान को “ब्योरा दोस्त” कहकर संबोधित किया है। यह शब्दावली भारत के लिए निश्चित ही चौंकाने वाली है।

🇮🇳 भारत की अनदेखी और बढ़ती चिंताएं

भारत, जो अमेरिका के इंडो-पैसिफिक विजन का अहम हिस्सा है और क्वाड (QUAD) जैसे ग्रुप्स का सक्रिय सदस्य है, उसकी रणनीतिक चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

  • पाकिस्तान न केवल आतंकवाद का समर्थन करता है बल्कि चीन के साथ मिलकर भारत के खिलाफ रणनीतिक दबाव बनाता है।
  • इसके बावजूद अमेरिका का पाकिस्तान को न्योता देना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या अमेरिका वाकई भारत को प्राथमिकता दे रहा है?

🧠 क्या है अमेरिका की रणनीति?

कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका की यह नीति “चीन को काउंटर” करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

  • चीन और पाकिस्तान की नजदीकी बढ़ रही है, और अमेरिका इस गठबंधन को कमजोर करना चाहता है।
  • ऐसे में अमेरिका पाकिस्तान को फिर से अपने खेमे में खींचना चाहता है — भले ही इसके लिए भारत की नाराज़गी क्यों ना सहनी पड़े।

🔍 भारत की अगली चाल क्या हो?

भारत को इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट संदेश मिल रहा है कि कूटनीति में कोई स्थायी दोस्त नहीं होता, सिर्फ हित होते हैं।

  • भारत को अमेरिका के समक्ष स्पष्ट और मजबूत संदेश देना होगा कि ऐसे कदम द्विपक्षीय विश्वास को कमजोर कर सकते हैं।
  • इसके साथ ही भारत को रूस, फ्रांस, और अन्य क्षेत्रीय मित्र देशों के साथ अपनी रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाना होगा।

🧾 निष्कर्ष

अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिए गए सम्मानजनक न्योते ने भारत के रणनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। यह देखना अब महत्वपूर्ण होगा कि भारत इस घटनाक्रम को कैसे जवाब देता है और क्या अमेरिका अपने रुख में बदलाव करता है या पाकिस्तान को ही प्राथमिकता देता है।

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